03 May 2010

अफ़सोस के फ़साने सजाना
दर्द को खूबसूरत बनाना

दिखता न हो जब खुशियों का आलम
ग़म की गहराईयों में डूब जाना

दुनिया से ताल्लुख एक नज़्म का रह जाये
बात वो रोते हुए एक ऐसी कह जाए

समझोगे तुम जिसे जब डूब रहे होगे
वर्ना तो जलवों में क्या खूब रहे होगे ...

2 comments:

士瑋 said...
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Glennie9654 said...
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