27 May 2010

अमीर बाप की बेटी का आशिक ग़रीब
ग़रीब बाप के बेटे का खुल गया नसीब

छोरे ने सपना सजाया राजकुमारी ब्याहने का
अमीर बाप खामियाज़ा भरेंगे बेटी के चाहने का

राजकुमारी घर आयेगी रानी बन जाएगी
बेटे की कमाई पूरी ससुराल खाएगी

ससुरजी का कार ओ बार
बीवी का प्यार

1०० रुपये का नोट माँगा था
५०० का मिला यार

अब lottery लगी है तो lifestyle change
लोग आज भी कहते हैं

ऐसे लंगूर से ऐसी हूर कैसे पट गयी
It's so strange.

2 comments:

Taahaaa said...

sahi hai boss!!

Instinctivecuriosity said...

hehe.. kya kya sochte rehte ho!